Tu duniya ki chinta chhordh de

​तू दुनिया की चिंता छोड़

छोड़ दे तू,
बस नीचे गिरता जाएगा

तू दुनिया की चिंता छोड़ दे
अपने लक्ष्य से डग मगा जायगा

तू दुनिया की चिंता छोड़
ये सबसे दुखी है
तू तो इंसान है
ये तो भगवान से भी दुखी है

Think about yourself
Think about yourself

तू दुनिया की चिंता छोड़
अपना समय बर्बाद ना कर

कुछ करके दिखा
कुछ बनकर दिखा
मुह थोड़ जवाब दे

तू दुनिया की चिंता छोड़
बस अपनी चिंता कर

वक़्त रेत की तरह फिसलता जा रहा है
उसको संभाल
उसको बचा
उसको काम पर लग्गा​​
अपने लक्ष्य से दूर न हो जाना

तू दुनिया की चिंता छोड़
बहुत मिलेंगे दुनिया की करते हुए
कोई न मिलेगा तेरी चिंता करते हुए
इसलिए
रुक जा
और
चिंता करना छोड़

तू दुनिया की चिंता छोड़ !!!

2 thoughts on “Tu duniya ki chinta chhordh de”

  1. अति उत्तम। सुगंधा जी आप ने जिश तरह हिंदी साहित्य की पंखुड़िया से जो मीठी कविता की सियाही से जो खूबसूरत दर्पन दिखाया है मुझे लगता है थोड़े वर्सो में आप की लिखी हुई कविताये उच्च विद्यालय में पढ़ाये जाएंगे।

Leave a Comment

CommentLuv badge

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.