क्या कहूँ

मैं खुद में खो चुका हूँ
तुमसे क्या आकर कहूँ

मैं खुद में ढल चूका हूँ
तुमसे क्या शिकायत करूँ

Kya Kahun

तू सूरज की तरह चमक चुकी है
तू हवा की तरह चलने लगी है
तू तेज है पानी की तरह
तू रौशनी है आग की तरह
तेरा दिल बहुत कोमल है
तुझसे क्या आकर कहूँ

तुझे पता नहीं ये दिल पत्थर का है
तू लोहा है तुझसे क्या कहूँ

 

Image by lisa runnels from Pixabay

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