अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं

अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं
अब कोई हलचल नही है दिल मैं

में पत्थर की बनना चाहती हूँ
मैं बेजान हो जाना चाहती हूँ

मैं टूट कर बिखर रही हूँ
मैं आग मैं सुलग रही हूँ

मैं अपनो की नज़रो मैं गिर गयी हूँ
मै अपनो से दूर हो गयी हूँ

Hindi Sad Poem for girl
Hindi Sad Poem for girl

 

अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं
अब कोई हलचल नही है दिल मैं

 

कुछ ख़ुआब थे मेरे
सब टूट गए

कुछ अपने थे मेरे
सब छूट गए

कुछ बातें थी
जो बस तुझसे करनी थी

कुछ लम्हे थे
जो बस तेरे साथ जीने थे

सब छूट गया
सब रूठ गया

में पत्थर की बनना चाहती हूँ
मैं बेजान हो जाना चाहती हूँ

 

अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं
अब कोई हलचल नही है दिल मैं

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