भीड है भीड मे खो जाने दो

Bheedh Hai Bheedh Main Kho Jaane do!
Bheedh Hai Bheedh Main Kho Jaane do!

 

भीड है भीड मे खो जाने दो.
कुछ अपना सा हो जाने दो.
तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो.
एक बस मकसद है , पूरा हो जाने दो.
भीड मे मुझे खो जाने दो
वो बड़  रहा है , उसे बड़ने दो.
उससे मुझे कुछ सीख जाने दो.
कल क्या पता मै भी वहां होंगा
मुझे बस उप्पर्  उठ  जाने दो.
भीड मे मुझे खो जाने दो.
राह बहुत  कठीन है ,
उसे और कठौर  हो जाने दो.
मुश्किल मे साथ छोड़ दे अपने ,
उन्हे छोड़ जाने दो.
कल सवेरा  आयेगा , अंधेरा  जायेगा
सुबह  को हो जाने दो.
बस मुझे भीड मे खो जाने दो!!

Bheedh Hai Bheedh Main Kho Jaane do!
Bheedh Hai Bheedh Main Kho Jaane do!

भीड है भीड मे खो जाने दो – Is a motivational poem which is depicting about the person who wants to make his name in another city where nobody knows him with all the hard work and motivation he will make his own name in the city.

 

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