Poem for self – a children day poem

 

अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम,

इन रीति रिवाज़ों में
इन तीज त्योहारो में
इन दुनिया की रस्मो मैं
मीठे वादों में

अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम,

शहर की चखा चौन्द मैं
गाव की मिट्टी मैं
अपनो के साथ
अपनो से दूर
दुनिया की रस्मे निभाते निभाते

अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम,

child within you

 

ये दुनिया तो आपको अपने रंग मैं रंग देगी
ये दुनिया तो आपको अपने जैसा बना देगी
इस दुनिया की ना सुनना तुम
इस दुनिया से ना डरना तुम
अपना रंग
अपनी पहचान
ना खो देना तुम
अपनी छाप छोड़ जाना तुम

अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम,

किसी भी गली
या हो कोई भी मोहल्ला

किसी भी शहर
या कोई भी हो देश

किसी भी समाज के हो तुम
या कोई भी हो उम्र

कैसी भी हो परिश्थिति
या कोई भी हो मुशकिल

कितने ही हो मुश्किल हालात
या हो कोई बड़ी अड़चने

बस तुम अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना ।।
बस तुम अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना ।।

This children’s day take a pledge, you will always keep alive child within you..

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