Poem for self – a children day poem

child within you

  अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम, इन रीति रिवाज़ों में इन तीज त्योहारो में इन दुनिया की रस्मो मैं मीठे वादों में अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम, शहर की चखा चौन्द मैं …

Read morePoem for self – a children day poem

अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं

Hindi Sad Poem for girl

अब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं अब कोई हलचल नही है दिल मैं में पत्थर की बनना चाहती हूँ मैं बेजान हो जाना चाहती हूँ मैं टूट कर बिखर रही हूँ मैं आग मैं सुलग रही हूँ मैं अपनो …

Read moreअब कोई ख्वाइश नही है दिल मैं

पता ही न चला

Childhood Memories

कब उंगली पकडे पकडे हाथ छोड़ कर भागने लगा पता ही न चला कब जिंदगी को सुलझाते सुलझाते खुद उलझ गया पता ही न चला रिस्ते बहुत नाजुक थे उन्हें जीवन भर एक डोर में भांदे रखना था कब वो …

Read moreपता ही न चला

क्या कहूँ

क्या कहूँ

मैं खुद में खो चुका हूँ तुमसे क्या आकर कहूँ मैं खुद में ढल चूका हूँ तुमसे क्या शिकायत करूँ तू सूरज की तरह चमक चुकी है तू हवा की तरह चलने लगी है तू तेज है पानी की तरह …

Read moreक्या कहूँ

बदलता जमाना

badalta zamana

वक़्त है आज गुजर जायेगा तेरा साथ है एक दिन छूट जायेगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जायेगा वक़्त है आज गुजर जायेगा तू आज साथ है मै बड़ा जो हूँ कल मैं छोटा होंगा तू भी बदल जायेगा बदलेगा …

Read moreबदलता जमाना